ब्रिटिश कालीन गंगोली राजनीतिक भूगोल की ऐतिहासिक शुरूवात सन् 1815 में गोरखा सेना के पराजय के साथ हुई। ‘‘ता. 27 अपै्रल, 1815 को अल्मोड़ा की राजधानी में अंगरेजों का अधिकार होने से सारा कुमाऊँ उनके आधिपत्य में आ गया।’’ कुमाऊँ के प्रथम कमिश्नर गार्डनर ने लगभग छ महीने शासन में अंग्रेजी राज्य की नींव रखी।…
स्वागत करता है उत्तराखण्ड इतिहास –
उत्तराखण्ड के प्राचीन इतिहास के मुख्य स्रोत धार्मिक ग्रंथ और विभिन्न स्थलों से प्राप्त अभिलेख हैं। इस पर्वतीय राज्य का सबसे प्राचीन राजवंश ‘कुणिन्द’ को माना जाता है, जिसका प्राचीनतम् उल्लेख महाभारत से प्राप्त होता है। द्वितीय शताब्दी ईस्वी पूर्व से तृतीय शताब्दी ई. मध्य तक कुणिन्द जनपद पंजाब से उत्तराखण्ड तक विस्तृत था। इस…
दीपचंद का अल्मोड़ा ताम्रपत्र
दीपचंद का अल्मोड़ा ताम्रपत्र एक महत्वपूर्ण साक्ष्य है, जो चंद राज्य व्यवस्था पर प्रकाश डालता है। दीपचंद कुमाऊँ के चंद वंश के अंतिम दीप थे, जिनके शासन का उजाला 25 वर्ष से अधिक समय तक रहा था। कुमाऊँ के प्रथम चंद राजा रुद्रचंददेव (1565-1597) के उत्थान से इस वंश के पतन (सन् 1790) तक केवल…
कुमाऊँ राज्य के वैदेशिक संबंध
कुमाऊँ राज्य पर प्रथम रोहिला आक्रमण सन् 1743 ई. में किया गया था। रोहिला सेना लूटपाट करते हुए चंद राज्य की राजधानी अल्मोड़ा पहुँच गयी। इतिहास की यह प्रथम और अंतिम घटना थी कि मुस्लिम आक्रमणकारी सेना चंदों की राजधानी में प्रवेश कर गयी। इस आक्रमण के समय कुमाऊँ राज्य के वैदेशिक संबंधों की जानकारी…
कुमाऊँ राज्य पर प्रथम रोहिला आक्रमण
कुमाऊँ राज्य पर प्रथम रोहिला आक्रमण सन् 1743-44 ई. में किया गया था। मध्यकाल में कुमाऊँ राज्य की पूर्वी और पश्चिमी सीमा पर क्रमशः डोटी व गढ़वाल परम्परागत शत्रु राज्य थे। प्राचीन काल से ही उत्तर में स्थित विशाल हिमालय और दक्षिण में तराई का सघन वन क्षेत्र इस पर्वतीय राज्य हेतु सुरक्षित प्राकृतिक…
विष्णुवर्मन का ताम्रपत्र- पौरव वंश
विष्णुवर्मन का ताम्रपत्र पौरव वंश और ब्रह्मपुर के इतिहास पर प्रकाश डालता है। इस राजा के वंशजो का शासन ब्रह्मपुर राज्य में लगभग छठी शताब्दी के आस पास था। इस वंश का इतिहास केवल ताम्रपत्रों में ही समाहित था। ये ताम्रपत्र गढ़वाल सीमावर्ती अल्मोड़ा जनपद के स्याल्दे तहसील के तालेश्वर गांव से एक खेत…
विष्णुवर्मन का ताम्रपत्र : प्रथम बारह पंक्तियाँ
विष्णुवर्मन का ताम्रपत्र ब्रह्मपुर और पौरव वंश के इतिहास पर प्रकाश डालने वाला एक महत्वपूर्ण स्रोत है। विष्णुवर्मन सोमदिवाकर या पौरव वंश का शासक था। इसके वंश का शासन उत्तराखण्ड में स्थित पर्वताकार राज्य में लगभग छठी शताब्दी के आस पास था, जिसकी राजधानी ब्रह्मपुर नामक नगर में थी। उत्तराखण्ड के इस प्राचीन…
विष्णुवर्मन का ताम्रपत्र -ब्रह्मपुर का पौरव वंश
विष्णुवर्मन का ताम्रपत्र ब्रह्मपुर के पौरव वंश के इतिहास पर प्रकाश डालने वाला एक महत्वपूर्ण स्रोत है। पौरव वंश का चतुर्थ शासक द्युतिवर्मन था, जिसके मृत्यूपरांत उसका पुत्र विष्णुवर्मन ब्रह्मपुर का शासक हुआ। इस पौरव राजा ने भी पिता की भाँति राज्य संवत् में ताम्रपत्र निर्गत किया, जिसके कारण इस वंश के शासन काल को…
सोमचंद-एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व
सोमचंद एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व ही नहीं थे, बल्कि कुमाऊँ राज्य के नींव के पहले पत्थर थे। कहा जाता है कि सोमचंद उत्तर प्रदेश के झूसी से चंपावत आये थे। झूसी से कुमाऊँ आने की तिथि तो ज्ञात नहीं, पर सिंहासनारूढ़ होने की तिथि को पंडित रुद्रदत्त पंत ने संवत् 757 विक्रमीय या 622 शाके या…
पौरव शासक- द्युतिवर्मन ताम्रपत्र
द्युतिवर्मन पौरव वंश का शासक था। उसके वंश का शासन उत्तराखण्ड के ब्रह्मपुर राज्य में लगभग छठी शताब्दी के आस पास था। इस वंश का इतिहास केवल ताम्रपत्रों में ही समाहित था। द्युतिवर्मन का ताम्रपत्र अल्मोड़ा जनपद के गढ़वाल सीमावर्ती तालेश्वर गांव से सन् 1915 ई. में प्राप्त हुआ। इस गांव में खेत की…